दिवाली के त्यौहार पर पटाखों की पाबंदी

१६ नवंबर दिवाली का त्यौहार था सरकार ने पटाखों पर पाबंदी लगा रखी थी जिसके बावजूद भी हमने काफी जगह पर पटाखे फोड़ते देखें मनुष्य व पक्षियों के लिए वायु प्रदूषण के लिए बहुत ही हानिकारक है इसके बावजूद भी लोगों ने पटाखे का इस्तेमाल किया सरकार के लाख पाबंदियों के बाद भी लोग पटाखों  की खरीदारी भी कि मनुष्य अपने जीवन का सिम दुश्मन है यदि वह यह सब बंद कर दे तो हम काफी बीमारियों से बाज पशुओं को हानिकारक वायु प्रदूषण से बचा सकते हैंपारदर्शी बनाए नियमों का पालन करना चाहिए और हमें उनकी बने बनाए नियमों का पालन कर अपने भारत को स्वच्छ बनाना चाहिए ।

पटाखे वायु प्रदूषण के साथ-साथ मनुष्य को भी काफी हानि पहुंचाते हैं कई बार हम दीवाली के बाद यह कई की न्यूज़  ,खबरों में सुनते हैं कि कई व्यक्ति पटाखे से जलकर कर घायल हो गए या कई लोगों की मृत्यु क हो गई घर वालों  झोपड़ियां जल गई ऐसे ही भारी नुकसान हो जाते हैं क्या हम दिवाली पटाखों के बिना नहीं बना जा बना सकते हैं क्यों ना हम दिवाली को मनाने का तरीका बदले और लोगों की सोच भी बदले भूत;
दिवाली का त्यौहार पटाखों पर ही निर्भर होता है कई बार हम मिठाइयां व दीए जलाकर व नए कपड़े पहन कर एक-दूसरे को उपहार देकर भी दिवाली मना सकते हैं खुशी हमें यह सब करने मिलती है वो खुशी में पटाखे जलाने में नहीं पटाखे से कई प्रकार के नुकसान भी होते हो और कैसी भी भूल जाते हैं दो पल की खुशियों के लिए हम लाखों पैसे उड़ा देते हैं उसी पैसे से अगर हम गरीबों को दान करें और उन्हें घर-घर में मिठाइयां बांटे वह  कपड़े दे तो दिवाली का त्यौहार और भी बेहतर तरीके से बनाया जा सकता है और आपके साथ-साथ गरीबों को भी खुशी बांटे।,✍️...

     अंजना यादव✍️✍️ ....

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