फिल्म समीक्षा
दंगल फिल्म धाकड़ बेटियों के धाकड़ पिता यह एक जबरदस्त फिल्म फिल्म के निर्देशक नितेश कुमार जी है। महावीर फोगट , पूर्व, नेशनल लेवल का पहलवान हैं जो हमेशा एक बेटे की चाह में होता हैं। वो बेटा जो उसके लिए गोल्ड मेडल जीत कर ला सके किसी इंटरनेशनल इवेंट में लेकिन चौथी बार भी उसे लड़की होती हैं। माहावीर फोगत दुखी हो जाता है और अपने गोल्ड मेडल को अलविदा कह देता है। हालांकि लड़की और लड़के में अंतर उसके लिए तब मिटता जब उसकी दो छोटी बेटि गीत (जा़यरा वसीम ),और बबीत (सुहानी भटनागर )पड़ोस के दो लड़को को बुरी तरह पीट देती हैं । क्योंकि उन लड़कों ने लड़कियों पर गलत कमेन्ट करते हैं। माहावीर को तुरंत इस सच्चाई का एहसास हो जाता हैं की गोल्ड तो गोल्ड ही रहेगा चाहे लड़की या लड़का जीत कर लाये। और यही से सुरृ होती हैं फिल्म की थीम लाइन -महारी छोरीया छोरों से कम है के? अमीर खान, फातीमा सना सेख और संन्या मनोहतरा स्टार फिल्म दंगल कटेट के मामले में बेहद दमदार है। माहावीर फोगत उनकी बेटी गीता फोगत, बाबीता के संघर्ष की कहानी को बखूबी पढ़ा गया हैं। वह सहरानीय है। ् जानिए फिल्म की पूर...