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कोरोय महामारी मिहलाओ पर भारी

हमारी कहानी का शीर्षक कोरोना महामारी माहिलाओ पर भारी है जिस प्रकार हम सभी जानते है कारोना काल से कैसे उभरे है ? यह कहानी एक महिला की है जो गोमती नगर मे किराये पर रहती थी कारोना के कारण पति काम पर नदी जाता था और उसे पैसे मागता वह महिल दिन रात घरो मे काम करके पैसे कमाती थी अपना और बच्चो का खर्चा देखती थी . करोना काल मे उसका परि उसे रोज मारता पिटता और पैसे लेकर शराब पीता महिला के पास न खाने के पैसे रहते वह कैसे करके किसी तरह अपने बच्चो का पेट भारती एक दिन उसकी तबियत बहुत खराब हो जाती आस पास के लोग उससे हस्पताल ले जाते उसका इलाज करा ते और उसे समझा ते की वह अपने बच्चो को लेकर गॉव चती जाये वह अपने पति से परेशान होकर अपने बच्चो को लेकर गाँव चली जाती है ।

नही चाहिए

    पास बिठा कर बडे प्यार     से बाबुल ने पूछा बिटिया से           क्या गुण खोजू               वर में तेरे              शर्माती      सकुचती  बोली बेटी        नही चाहिए कोई             राम मुझे           सीता पर न          करके भरोसा         धोबी की बातो            मे आकर        लेली ली जिसने          अग्नि परिक्षा न ही मुझको कृष्ण चाहिए जिसने रुकमणी के होते     राधा संग रास रचाते न ही लक्ष्मी जी की तरह मै चरण दासी बन कर       रहना चाहती            हूं न ही पांडव जैसे वीर कोई  हार जुए में दाव लगा दे पति हो तो शिव जैसे  मेरे नाम से अपना नाम  अर्धनारीश्वर गर्व से बोले रुप ...

गाँधी जायन्ती

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पिपरसड़ पास स्टडी हॉल कॉलेज में एक अक्टूबर को बच्चो ने गाँधी जयन्ती व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म दिन  खूब धूमधाम से बच्चो ने मनाया भषणा दिये गाँधी जी के जीवन की यात्रा को बताया किस प्रकर उन्होने संघर्ष किये और उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया । देश को  अंग्रेजों  से  कैसी आजादी दिलाई  आदि बाते बताई  कॉलेज के बच्चों ने विविध कार्यक्रम भी आयोजित किए जिसमें बच्चों ने देशभक्ति से लेकर वर्तमान में चल रही व्यवस्था पर गीत और नाटक प्रस्तुत किए  कुछ बच्चों ने एक नाटक के माध्यम से गांधी जी के तीन बंदरों द्वारा बताए गए नियमों का पालन कैसे करना चाहिए वह आज के लोग कैसे उसका पालन कर रहे हैं आदि के बारे में लोगों को समझाया और बताया कि हमें इन गांधी जी के बंदरों द्वारा नियम का पालन करना चाहिए गलत नहीं देखना चाहिए गलत नहीं सुनना चाहिए गलत नहीं बोलना चाहिए और यदि कोई गलत कर रहा हो तो उसे रोकना चाहिए कभी किसी की बुराइयां नहीं सुननी चाहिए आज तीन मूल्यों का पालन करना चाहिए ।व कॉलेज के बच्चों द्वारा कुछ प्रतियोगिताये भी आयोजित की ...

राही

राही सफर के  अक्सर किताना कुछ चलता रहता है हमारे दिल और दिमाग मे पर हम किसी से हम सब कुछ कह कहा पाते है... कुछ अनकही सी उलझने और कुछ उलझी सी परेशानिया बस सोचते रह जाते है पर किसी से कह कहा पाते है ... माना जिन्दगी मे कुछ उलझनो का कोई हल नही फिर भी हम सही वक्त का इंजार कर ही कहा पाते है ... यह जिन्दगी है जनाव किसी के चाहने से नही चलती उलझ जाते है राही पर यह हम मान ही कहा पाते है ।✍️✍️✍️ ANJANA YADAV

औरत का वजूद

औरत हूं, मेरे वजूद से  मत खेलना ... मौन हूं मुझे कमजोर मत समझना ... आईने सी साफ हू ... तोडने की कोशिश मत करना ... मेरे असितत्व पर सवाल उठाने की कोशिश मत करना ... हस कर जवाब देना आदत है मेरी ... इसे मेरे चरित्र का प्रमाण मत समझना ... जिस दिन मै बोल उठी उस दिन तुम चुप हो जाओगे ... बिना वजह मुझ पर कटाक्ष मत लगाना ... अपनी बातो से मेरे दिमाग को छूना ... मेरे दिल को ठेस पहुंचाने की कभी हिम्मत मत करना ... औरत हू मेरे वाजुद से कभी खिलवाड मत करना ... अब बात नरी के इज्जत की है ।🙏🏻  अन्जना यादव✍️✍️

दिल की बाते ...

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कही खो गई हूं इसलिए खुद को ढूढने लगी हूँ ... बहुत दर्द मिला है सबसे इसलिए अपने काम से काम रखने लगी हूँ ... बहुत चुभती थी मेरी शिकायते इसलिए अपने जुबान पर लगाम रखने लगी हूँ ... बहुत बार मेरा विश्वाश टूटा है इसलिए विश्वास के नाम से डरने लगी हू...✍️✍️ धन्यवाद

मेरी प्यारी टीचर🥰🥰

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कुछ यादे आये संग बहार लिए ,जा रहे उसे साथ लिए कहा ? पूछ रहा यह चमन तरुण बोलो मेरा  गुलजार कहा ? बेलि लगाई शिक्षक की सीच रहे श्रम जल से तुम, पनपी हरियाली मे फूली  खुशबू भी दे जाते तुम  आया था उल्लास नया, चेतना नयी लहरायी , गम  जड़ता का भार दिये जा रही थी दिल बहलाती  जो उगे अरुण जो विभा तरुण से ले प्रकाश फैलाने को दूर हुए जाते क्यो फैलाते तुम पुॅज  पहरो को । दीप जलाये शिक्षक उर मे आशा  के, नवजीवन के, सेवा निव्रति के विरह झकोरे पवन चले उत्पीडाण के गाऊँ क्या दिल उमग न पता  दिल अब  इस पीढा से कभी उभर न पता  आये संग बहार लिए जा रहे साथ लिये कहा । धन्यवाद✍️✍️ ...🥰🥰🥰