नही चाहिए
पास बिठा कर बडे प्यार से बाबुल ने पूछा बिटिया से क्या गुण खोजू वर में तेरे शर्माती सकुचती बोली बेटी नही चाहिए कोई राम मुझे सीता पर न करके भरोसा धोबी की बातो मे आकर लेली ली जिसने अग्नि परिक्षा न ही मुझको कृष्ण चाहिए जिसने रुकमणी के होते राधा संग रास रचाते न ही लक्ष्मी जी की तरह मै चरण दासी बन कर रहना चाहती हूं न ही पांडव जैसे वीर कोई हार जुए में दाव लगा दे पति हो तो शिव जैसे मेरे नाम से अपना नाम अर्धनारीश्वर गर्व से बोले रुप ...