हिन्दी दिवस पर नारा,
अब ,आ, आ, ई है वो धाराये जिन्होंने ने मिल कर शब्द बनाये शब्द नाद, लिपियों से कविरो ने कितने सुन्दर छंद बनाए अलंकार तथा श्रृंगार रसों से तुलसी जी के दोहे मन को भाये आज चलो सभी इस पवृ हिन्दी को गर्व सम्मान से अपनाते।
हामारी हिन्दी भाषा को सत् सत् नमन
धन्यवाद
अंजना यादव ..
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