कर्मों का फल

(यह घटना गोमती विशाल खण्ड चार की है)

कर्मों का फल कहानी का तात्पर्य है यह  कहानी एक छोटे से गांव की है जहां एक छोटा सा परिवार रहता था दो भाई दो बहन माता- पिता या परिवार बडी खुशहाली से अपना ज जीवन व्यतीत कर रहा था अचानक पिता के साथ एक हादसा होता है जिससे पिता अपंग हो जाते हैं पिता के अपंग होने पर माता का दिन रात उन्हीं का ध्यान रहता हैपिता की सेवा में लगी रहती है वह बच्चे घर पर अकेले मन   मर्जी का काम करते हैं घर पर  किसी के ना होने पर छोटी बेटी घर  पर रह रहे किराएदार के साथ मित्रता का संबंध बनाती है संबंध इस प्रकार स्थापित हो जाता है कि माता का पिता के पता  चलने  बेटी की  पिटाई व किराएदार को कमरे से निकाल दिया जाता यह सब जानते हुए भी वह लड़की नहीं मानती है स्कूल जाने के बहाने रोज  लड़के से मिलती है और उसे घर से पैसे ले जाकर उसे देती है अचानक उसके भाई को पता चलता है इसके कारण लड़की को कमरे में बंद कर दिया जाता है अगले दिन मौका मिलते ही वह अपने घर से सामान लेकर उस व्यक्ति के घर चली जाती हैयह देखते हुए माता-पिता पुलिस में कंप्लेंट करते हैं अभी पुलिस ढूढती है वह लड़की उससी लडके  के घर में मिलती है अगले दिन लड़की के गर्भवती होने का पता चलता है यह सुनकर माता-पिता बहुत ही परेशान होते हैं और उस लड़के से शादी करने को कहते हैं लड़का( नीची )जाति की लड़की होने के कारण शादी से मना कर देता है  पैसे देने को  कहता है लड़की के माता-पिता पैसे लेने से इनकार कर देते हैं और उसे शादी करने पर मजबूर करते हैं  दबाव में आकर  लड़का शादी कर लेता है लड़का लड़की दोनों ही जाकर मंदिर में शादी करते हैं माता-पिता भी मौजूद होते हैं साथ ही शादी पर जहां माता-पिता से कहता है कि आप दोबारा अपनी बेटी को देखने यहां मत आइएगा चाहे वह जैसे भी रहे लड़का लड़की पर इतने अत्याचार करता है दिन रात उसे खाना पीना ना देकर   काम कराता है लड़की दिन रात रोती  रहती है यह
 कहानी हमें बताती है कि हमें कुछ भी करें से पहले अपने माता-पिता से एक बार बता देना चाहिए माता पिता कभी किसी का बुरा नहीं चाहते हैं नाबालिक होने के कारण लड़की गर्भवती  होने के कारण 5 महीने बाद मृत्यु हो जाती है ।✍️✍️
(यह घटना गोमती नगर विशाल खण्ड चार की है)

 अंजना यादव ..

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