गरीब मजबूर मां की भूख

एक उषमा नाम की महिला बहुत ही गरीब थी वह तीन दिन से कुछ भी खायी पी नही थी वह साथ मे एक छोटे से बच्चे को गोदी मे लेकर स्टेशन पर बैठी थी तभी उसके सामने से एक महीला गुजरती है वह उसे दो रुपये देती है वह दो रुपये लेकर सोचती है की दो रुपये मे आज कल क्या मिलता है?

यह बात सोचते ही वह अपने अतीत के बारे मे सोचने लगती है उष्मा एक बहुत ही अमीर घर की एकलौती लड़की थी उसके माॅ बाप ने उसे बहुत ही लाड प्यार से पाला था ' उसकी हस्ती खेलती जीवन कैसे दुख मे बदत जाता है?

उसके जीवन मे एक लड़का आता है और उसे बहला फुसला कर उसे शादी करने का बोलता है और उष्मा उसकी  बातो मे आ जाती है और अपने घर के कुछ पैसे जेवर लेकर उसके साथ भाग जाती है वो लड़का यह नाटक सिर्फ उष्मा की दौलत पाने के लिए करता है उष्मा के यो बच्चे होते ही  घर के सारे पैसे लेकर उष्मा को बीच सडक पर छोड कर चला जाता है।

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