कुछ तो लोग कहगे

विधलय जिसे एक पवित्र स्थान का दर्जा दिया जाता है वहा राजू नाम का एक लड़का पढता था । आमतौर पर राजू जैसे छोटी उम् के बच्चे विधायलय से दूर भागते है क्योकि उन्हे पढाई से ज्यादा खेल - कूद मे ज्यादा लगता है लेकि राजू अलग था उसे पढ़ाई करना माॅ का हाथ बटान बहुत पसंद था वह अपना पूरा समय पढ़ाई व अपनी माँ के साथ बिताता था । सभी पडोसी व रिश्तेदार उससे बहुत प्यार व दुलार करते तथा अपने बच्चो को राजू की तरह बनने मिसाल देते है। राजू भी अपनी माँ की जरूरतो को खूब ख्याल रखता । एक दिन जब राजू की मा बजार गई थी जब घर आई तो देखा राजू श्रृगार का सारा सामान निकाल कर खुद बडे प्यार से सजा रहा था । माॅ ने देखा तो वह जोर जोर से हँसने लगी व सामान उठा कर खुद से सजाने लगी दोनो घर के आगन मे खूब खेले झुमे पर राजू के पापा के आते ही मानो शांति ही छा गई  हो राजू के पिता का राज का बरताव कूछ ठीक . नही लगा राजू राजू की मा के समझाने पर राजू के पिता को गुस्सा शांत हुआ और राजू की नादान समझ कर माफ कर दिया । राजू शांत रहने लगा । कुछ दिनो बाद सब पहले की तरह साधारण सा होने लगा पर राजू न जाने दोपहर मे एक दम सेगायब हो जाता है मॉ यह बात का पता लगना शुरु किया तो पाया राजू अपनी मा की साडी व कुछ श्रृंगार की चीजे लेकर एक बंद कमरे मे खुद सजकर आइने के आगे खुद को देखकर खुश होता । मॉगायब हो जाता है मॉ यह बात का पता लगना शुरु किया तो पाया राजू अपनी मा की साडी व कुछ श्रृंगार की चीजे लेकर एक बंद कमरे मे खुद सजकर आइने के आगे खुद को देखकर खुश होता । मॉ ने ये सब देखा तो वो समझ न सकी और सारी का राजू के पापा को बताई । अगले दिन राजू के माता पिताडॉकर से सारी बात बताई और किसी  मनोवैज्ञानिक से परामर्श लेन की बात की । डॉक्टर ने पहले राजू से मिलने की बात की और उसे एक दोस्त बन कर सारी परेशानी जानी और माता पिता को बताया की वह बकी बच्चो से अलग है और उसको देखभाल और उसके विचारो को समझने के लिए कहा । राजू की माॅ बहुत बूरी तरह प्रभावित हुई वह लोगों की बातो व उनके सब के बारे मे सोच कर परेशान हो रही थी घर आते ही अपना  सारा सामान बंधने लगी क्याकि वह समाज मे अपनी निदा नही करा सकती थी। .डॉकर से सारी बात बताई और किसी  मनोवैज्ञानिक से परामर्श लेन की बात की । डॉक्टर ने पहले राजू से मिलने की बात की और उसे एक दोस्त बन कर सारी परेशानी जानी और माता पिता को बताया की वह बकी बच्चो से अलग है और उसको देखभाल और उसके विचारो को समझने के लिए कहा । राजू की माॅ बहुत बूरी तरह प्रभावित हुई वह लोगों की बातो व उनके व्यंग  के बारे मे सोच कर परेशान हो रही थी घर आते ही अपना अपना सारा सामान बांधी क्योकि वह समाज मे अपनी निदा से डर गई थी राजू के  पिता पूरा दिन घर से बहर रहे और डॉक्टर की बातो पर विचार किया शाम ७ बजे घर आय तो  पत्नी को परेशान देखा व सारा सामान बधा हुआ पाया । राजू भी सहमा खडा था राजू को सत्वाना देते हुए उसके पास गए और बहुत ही सहज . लहजे मे राजू से बात की और पत्नी को पास कुला कर  समझाया और इस सच को मामने की बात कही।

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