बाल मजदूर है मजबूर
जिस मैदान मे खेलना था उस साफ करना ही जीवन बना
जिस जीवन मे हसना था उसमे आसू पीकर मजबूत बना
पेट भरना होता क्या है आज तक उसे मालूम नही
चैन की नीद होती क्या है आज तक उसे मालूम नही
बचपन कहा खो गया मासूम क्या बतायेगा
जीवन सडक पर गुजर गया वो यादे क्या सुनाएगा
कभी तरस भरी आँखो से वो दो वक्त की खता है
कभी धिक्कर के धक्के खा कर वो भूखा हो सो जाता है
बाल मजदूरी पाप है यह नियम तो बना दिया पर उसके हित मे कया ? या जीवन को कठिन बना दिया
जो आज खतरे मे है वो क्या भविष्या बनायेगा
जब पेट की भूख ही चिन्ता है
तो वो क्या पढने जायेगा
बाल मजदूर है मजबूर
यह नियम सताता है
अगर देश का भविष्य बचाना है
तो बाल मजदूरी अभिशाप को सब को मिल कर हटाना है ।
धन्यवाद
अंजना यादव✍️✍️✍️ ...
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