मेरी प्यारी टीचर🥰🥰

कुछ यादे

आये संग बहार लिए ,जा रहे उसे साथ लिए कहा ?
पूछ रहा यह चमन तरुण बोलो मेरा  गुलजार कहा ?
बेलि लगाई शिक्षक की सीच रहे श्रम जल से तुम,
पनपी हरियाली मे फूली  खुशबू भी दे जाते तुम 
आया था उल्लास नया, चेतना नयी लहरायी ,
गम  जड़ता का भार दिये जा रही थी दिल बहलाती  जो
उगे अरुण जो विभा तरुण से ले प्रकाश फैलाने को दूर हुए जाते क्यो फैलाते तुम पुॅज  पहरो को ।
दीप जलाये शिक्षक उर मे आशा  के,
नवजीवन के,
सेवा निव्रति के विरह झकोरे पवन
चले उत्पीडाण के
गाऊँ क्या दिल उमग न पता 
दिल अब  इस पीढा से कभी उभर न पता 
आये संग बहार लिए जा रहे साथ लिये कहा ।
धन्यवाद✍️✍️ ...🥰🥰🥰



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